आइजीएमसी में 14 महीने में हुआ 5 लाख 25 हजार 664 मरीजों का उपचार
शिमला।
कोरोना काल में जहां चंडीगढ़ पी.जी.आई. जैसे अस्पताल में ओ.पी.डी. बंद पड़ी थी, वहीं आई.जी.एम.सी. में मरीजों का उपचार चलता रहा। यहां पर ओ.पी.डी. को बंद नहीं किया गया। कोरोना के नियमों की पालना करते हुए प्रशासन ने हिमाचल के लाखों मरीजों का इलाज किया और पूरे प्रदेश में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रखा गया। कोरोना काल में मरीजों का उपचार करने में प्रशासन ने मिसाल पेश की है। आई.जी.एम.सी. प्रशासन ने 14 महीने (1 मई 2020 से 30 जून 2021) तक का आंकड़ा जारी किया है। इन 14 महीने में ओ.पी.डी. में 5 लाख 25 हजार 664 मरीजों का उपचार हुआ है। जिसमें से 37651 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। यहां पर सबसे बड़ी बात तो यह है कि डॉक्टरों सहित अन्य स्टाफ ने इसी बीच 3374 कोरोना मरीजों के का भी उपचार किया है। कोरोना मरीजों के के उपचार के साथ साथ डॉक्टरों ने ओ.पीडी. में अन्य मरीजों का भी उपचार किया है। आई.जी.एम.सी. प्रशासन ने प्रदेश के मरीजों को कोरोना काल में बेहतरीन चिकित्सा सुविधा प्रदान की है। कोरोना काल में स्टाफ को अलग अलग बांटा गया था। कुछ डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की डयूटी कोविड तो कहियों की डयूटी नॉन कोविड मरीजों के चैकअप करने में लगाई गई थी। यहां पर स्टाफ की कमी होना भी एक तरह से चुनौती था, लेकिन पूरे स्टाफ ने बेहतरीन कार्य किया और चिकित्सा सेवाएं प्रदान की। आई.जी.एम.सी. में हिमाचल के कौने-कौने से सैकड़ों मरीज अपना उपचार करवाने आते है। यहां पर डॉक्टरों द्वारा किसी भी प्रकार की कोई लापवाही नहीं बरती है। कोविड काल में आई.जी.एम.सी. में रूटीन के ऑपरेशन जरूर कम किए थे, लेकिन आपातकालीन वाले ऑपरेशन चलते रहे। हालांकि रूटीन के ऑपरेशन भी कुछ दिनों के लिए कम किए थे बाद फिर सूचारू रूप से ऑपरेशन चलते रहे। इन दिनों भी सभी मरीजों के ऑपरेशन हो रहे है। अस्पताल में किसी भी मरीजों को कोई दिक्कतें नहीं आने दी जा रही है। आई.जी.एम.सी. में इन दिनों अब मरीजों की संखया और ज्यादा बढ़ गई है। रोजाना ओ.पी.डी में 2500 से 3000 के बीच मरीज पहुंच रहे है। सारी ओ.पी.डी. में रोजाना भीड़ लगी होती है। ऐसा कोई मरीज नहीं है जिससे की बिना उपचार करवाएं वापिस घर की ओर जाना पड़े।
कोविड के नियमों की करें पालना
प्रशासन ने आई.जी.एम.सी. में आने वाले मरीजों से यह अपील की है कि वे अपना उपचार जरूर करवाए, लेकिन कोविड के नियमों की पालना करे। लोगों को स्वयं भी सावधानी बरतनी होगी। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में लोगों को अस्पताल में सोशल डिसटेंसिंग का भी ध्यान रखना होगा और मास्क का भी सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा। ताकि स्वयं भी लोग सुरक्षित रहे और अन्य लोग भी सुरक्षित रहे।
इस संबंध में आईजीएमसिं के प्रशानिक अधिकारी डॉ राहुल गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में पूरे स्टाफ ने दिल जान से काम किया है। अस्पताल में प्रदेश भर से लोग अपना उपचार करने आए और उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया है। कोरोना काल में कोविड के मरीजों का उपचार करने के साथ-साथ अन्य मरीजों का उपचार करना एक तरह से चुनौती थी, लेकिन पूरा स्टाफ इसके लिए बधाई का पात्र है। डॉक्टरों सहित अन्य छोटे कर्मचरियों से लेकर अधिकारियों तक ने बेहतरीन सेवाएं दी है


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