शिमला, 21 जुलाई। भारतीय जनता पार्टी के सहकारिता प्रकोष्ठ, जिला शिमला की परिचय बैठक सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष नरेश चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जिला एवं मंडल स्तर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने तथा “सहकार से समृद्धि” अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिला शिमला के प्रत्येक मंडल में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और छोटी-छोटी सहकारी समितियों के गठन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।
प्रदेश अध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि और बागवानी पर आधारित है। प्रदेश में सेब, टमाटर, लहसुन, अदरक तथा विभिन्न प्रकार की सब्जियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। यदि इन उत्पादों का सहकारी समितियों के माध्यम से संगठित विपणन, वैज्ञानिक भंडारण, प्रसंस्करण और उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए तो किसानों और बागवानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता, आत्मनिर्भरता और समग्र ग्रामीण विकास का मजबूत आधार भी है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक मंडल में सहकारिता के विस्तार और जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला पदाधिकारी, मंडल संयोजक, सह-संयोजक तथा अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने सहकारिता आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का संकल्प लिया।
सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा : नरेश चौहान


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