शिमला, । हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता को लेकर प्रदेश सरकार और शिक्षक समुदाय के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। प्रस्तावित विधेयक के विरोध में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) ने मंगलवार को कड़ा विरोध जताया। संघ ने विधेयक को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, वित्तीय अधिकारों और चयन प्रक्रिया पर गंभीर आघात बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
HPUTWA का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के समक्ष विश्वविद्यालय शिक्षक समुदाय की चिंताओं को रखा और कहा कि प्रस्तावित विधेयक से प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय शक्तियां और स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, शोध, नवाचार और स्वतंत्र चिंतन के प्रमुख केंद्र हैं। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अकादमिक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालयों को प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्तर पर पर्याप्त स्वायत्तता मिलना जरूरी है। HPUTWA के अनुसार स्वायत्तता कमजोर होने का सीधा असर शोध, शिक्षण व्यवस्था और विश्वविद्यालयों के अकादमिक वातावरण पर पड़ सकता है।
UGC नियमों को लेकर भी जताई चिंता
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक पदों की नियुक्तियों को लेकर भी अपनी चिंता राज्यपाल के समक्ष रखी। संघ का कहना है कि विश्वविद्यालयों में चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप संचालित की जानी चाहिए।
HPUTWA ने आशंका जताई कि यदि चयन प्रक्रिया में ऐसे बदलाव किए जाते हैं जो UGC के मानकों से अलग हों, तो इसका विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली और अकादमिक गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। संघ ने यह भी कहा कि UGC के नियमों के अनुरूप व्यवस्था बनाए रखना विश्वविद्यालयों को मिलने वाली अनुदान राशि और अन्य वित्तीय सहायता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
HPUTWA ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करते हुए विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले शिक्षकों, शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय समुदाय से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में HPUTWA के महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज, उपाध्यक्ष डॉ. योगराज, एल्यूमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. चंद्रमोहन, प्रो. संजय, डॉ. राकेश, डॉ. धीरज रावत और डॉ. जोगिंदर सकलानी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
कुलपति कार्यालय के बाहर गरजे शिक्षक
राज्यपाल से मुलाकात के बाद HPU परिसर में कुलपति कार्यालय के बाहर शिक्षकों ने प्रस्तावित विधेयक के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में प्राध्यापक शामिल हुए। शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए विधेयक को वापस लेने की मांग की और कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर किसी भी प्रकार का आघात स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन को डॉ. सुरेंद्र शर्मा, डॉ. राजेश, डॉ. प्रियंका वैद्य, डॉ. सनी अटवाल और डॉ. जोगिंदर सकलानी ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता उच्च शिक्षा व्यवस्था की मजबूती की बुनियाद है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां और चयन प्रक्रिया योग्यता, पारदर्शिता तथा UGC के निर्धारित मानकों के अनुसार होनी चाहिए। वक्ताओं के मुताबिक विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होने से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य और अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित होने की आशंका है।
“स्वायत्तता सिर्फ शिक्षकों का नहीं, भविष्य का सवाल”
HPUTWA अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर किया जा रहा कोई भी आघात शिक्षक समुदाय स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता सिर्फ शिक्षकों का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।
महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का शिक्षक समुदाय स्वायत्तता की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने सरकार से वर्तमान विधेयक पर पुनर्विचार करने और विश्वविद्यालयों की वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले प्रावधानों को वापस लेने की मांग की।
HPUTWA ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शिक्षक समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया और विधेयक वापस नहीं किया गया, तो आंदोलन को आने वाले समय में और व्यापक किया जाएगा। संघ ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों और अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उसका लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सरकार का आघात तानाशाहीपूर्ण निर्णय: HPUTWA,राज्यपाल से मिला शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल, HPU परिसर में जोरदार प्रदर्शन; विधेयक वापस लेने की मांग


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