शिमला। राजभाषा हिंदी को कार्यालयी कामकाज में प्रोत्साहन देने एवं इसके संवर्धन हेतू प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत हिंदी पखवाड़ा मनाया गया। इस अवसर पर राज्य परियोजना कार्यान्वयन इकाई ने कृषि भवन शिमला में और सभी परियोजना निदेशकों ने अपने-अपने जिला कार्यालयों में कार्यालयी भाषा का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद, प्राकृतिक खेती पर सुलेख एवं नारा लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया।

इस मौके पर प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने हिंदी भाषा की महत्ता और इसके इतिहास के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हम दूसरी भाषाओं को ज्यादा तवज्जोह दे रहे हैं। ऐसे में हमें चाहिए कि दैनिक व्यवहार में हिंदी का प्रयोग करें और नई पीढ़ी को भी इसके प्रति प्रेरित करें।
इस मौके पर योजना के अधीन कार्यरत उप संपादक रमन कान्त ने हिंदी भाषा पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मन के भावों को व्यक्त करने के लिए हिंदी ही सर्वोत्तम भाषा है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत ज्यादातर साहित्य हिंदी भाषा में प्रकाशित किया गया है जिससे योजना आम जनमानस में ख्याति पा रही है। इस अवसर पर सभी जिलों में योजना से जुड़े जिला व खंड स्तर के 300 से कर्मचारियों व अधिकारियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
इस मौके पर योजना के अधीन कार्यरत उप संपादक रमन कान्त ने हिंदी भाषा पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मन के भावों को व्यक्त करने के लिए हिंदी ही सर्वोत्तम भाषा है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत ज्यादातर साहित्य हिंदी भाषा में प्रकाशित किया गया है जिससे योजना आम जनमानस में ख्याति पा रही है। इस अवसर पर सभी जिलों में योजना से जुड़े जिला व खंड स्तर के 300 से कर्मचारियों व अधिकारियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।


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