भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों से सराबोर हुआ विश्वविद्यालय परिसर
शिमला, शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) के पवित्र मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय *श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ* का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन का वातावरण भक्तिमय ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत रहा, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
कथा के अंतिम दिवस में *“सुदामा चरित्र”* का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। इस प्रसंग के माध्यम से सच्ची मित्रता, विनम्रता, भक्ति, कृतज्ञता, सादगी और नैतिक जीवन के महत्व को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता ने यह संदेश दिया कि निस्वार्थ भाव, सच्चे संबंध और अटूट श्रद्धा भौतिक संपत्ति से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।
प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता Swami Nivasacharya ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, मानवता और आधुनिक जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल डिग्रियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में करुणा, अनुशासन, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान तथा समाज सेवा की भावना विकसित करना है।
उन्होंने युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ संस्कारों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।
इस समापन समारोह में हिमाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल Anoop Rattan मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त शिमला नगर निगम की पार्षद Gitanjali Bhagra, Sheenm Kataria तथा महापौर सुरेंद्र चौहान की पत्नी Seema Chauhan ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक परिसर में ऐसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन करवाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक, शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण का निर्माण करते हैं, जिससे उनमें अध्ययन के प्रति समर्पण, अनुशासन, आध्यात्मिक चेतना और मूल्य आधारित जीवनशैली का विकास होता है तथा वे नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहते हैं।

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