शिमला। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने राज्य में हाल ही में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रिमण्डल ने प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के कारण 32 लोगों के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारी बारिश के कारण प्रदेश में अभी भी कम से कम 6 लोग लापता हैं और 12 घायल हो गए हैं।
मंत्रिमण्डल ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए हाउस बिल्डिंग एडवांस की दरों, पात्रता और अधिकतम सीमा में संशोधन को भी मंजूरी प्रदान की। एचबीए की अधिकतम सीमा अब मूल वेतन का 25 गुणा होगी। इसमें अधिकतम 15 लाख रुपये तक के नए निर्माण या नए घर एवं फ्लैट की खरीद और राशि चुकाने की क्षमता की शर्त लागू रहेगी। मंत्रिमण्डल ने कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को राहत के रूप में न्यूनतम 55000 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये का प्रावधान करने का निर्णय लिया। अनुबंध कर्मचारियों के परिजनों के लिए न्यूनतम 35000 और अधिकतम एक लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
मंत्रिमण्डल ने प्रदेश के निचले और मध्य क्षेत्रों के किसानों को लाभान्वित करने के लिए निजी भूमि से खैर के पेड़ों के कटान की नीति की समीक्षा करने को स्वीकृति प्रदान की। कांगड़ा जिला के राजकीय महाविद्यालय थुरल में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के 10 पदों को भरने का निर्णय भी लिया गया। मंत्रिमण्डल ने सोलन जिला के डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में अनुबंध आधार पर गैर-शिक्षण कर्मचारियों के 60 पदों को भरने का निर्णय लिया। बैठक में मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना के तहत 392 लाभार्थी परिवारों की दो वर्ष की प्रीमियम राशि को वापिस करने और 4484 लाभार्थी परिवारों के कार्ड की वैधता अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में राज्य कर एवं आबकारी विभाग में आबकारी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन एवं राज्य में आबकारी प्रवर्तन को सुदृढ़ करने के लिए 16 निरीक्षण वाहनों को किराए पर लेने की स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रिमण्डल ने सोलन जिला के नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क के निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के पक्ष में अपनी स्वीकृति प्रदान की।
बैठक के दौरान मंत्रिमण्डल के सदस्यों ने प्रदेश में सीमेंट की उपलब्धता एवं गुणवत्ता पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उद्योग और ग्रामीण विकास विभाग के निदेशकों और नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबन्ध निदेशक को स्थिति का जायज़ा लेने तथा तीन दिन के भीतर मुख्य सचिव को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।


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