शिमला,,,प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे चिट्टे के प्रयोग के खिलाफ शिमला में विभिन्न संस्थाओं ने मिलकर एक हिमाचल को चिट्टा मुक्त बनाने की पहल शुरू की है। सात जिलों की 17 स्वयंसेवी संस्थाएं ‘संजिवनी’ संस्था के बैनर तले एक मंच पर आईं और सर्वसम्मति से नशे के खिलाफ एक व्यापक जन अभियान शुरू करने का संकल्प लिया है।,,,संस्था के अध्यक्ष महेंद्र धर्माणी ने शिमला में कहा कि नशा हिमाचल के युवाओं को खोखला कर रहा है और अब समय आ गया है कि समाज, सरकार और प्रशासन मिलकर निर्णायक लड़ाई लड़ें। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में ‘चिट्टा’ नामक सिंथेटिक ड्रग ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। वर्ष 2014 में जहां मात्र 57.4 ग्राम चिट्टा पकड़ा गया था, वहीं 2024 में सिर्फ 11 महीनों में ही 16 किलो से अधिक नशा बरामद हुआ। गृह विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पकड़े जाने वाले नशे की मात्रा असली खपत का केवल 2 से 3 प्रतिशत होती है। उन्होंने कहा कि बैठक में निर्णय लिया गया है कि 25 सितंबर से 25 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान कम से कम 5,000 लोगों से सीधा संपर्क कर उन्हें नशा मुक्ति से जोड़ा जाएगा। वहीं नवंबर के पहले सप्ताह में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें सामाजिक संस्थाएं, खिलाड़ी, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और अधिकारी भाग लेंगे। धर्माणी ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे की दलदल से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन को भी छोटी मछलियों को पकड़ने के बजाय बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करनी चाहिए। जब तक प्रदेश पूरी तरह नशामुक्त नहीं होता, यह अभियान जारी रहेगा।


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