September 19, 2026

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर  गूंजा जाखू मंदरी  राजधानी में धूम धाम से मनाया जा रहा हनुमान जन्मोत्सव जाखू में हनुमान को चढ़ा सवा क्विंटल का रोट

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शिमला। राजधानी में गुरुवार को  हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है । हनुमान जयंति के उपलक्ष्य में जाखू मंदिर में सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुले और भक्तों द्वारा हनुमान की विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जाखू मंदिर में बजरंगबली को सवा क्विंटल का रोट चढ़ाया गया, जिसे विशेषकर गाय के दूध से बनाया गया था। इस मौके पर सभी भक्तों ने सुबह मंदिर पहुंच कर हनुमान की विशेष पूजा अर्चना की। मंदिर के पुजारी ने हनुमान जी की पूजा अर्चना की व हनुमान जी को सवा क्विटंल रोट का भोग लगाया। इसके बाद यह प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित किया गया।
 मंदिर के पुजारी बीपी शर्मा ने बताया कि सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी पिछले 10 सालों से लगातार यहां पर रोट और भंडारे का आयोजन करते आ रहे हैं। यह आयोजन लोक कल्याण के  लिए प्रतिवर्ष किया जाता है। इस वर्ष भंडारे में स्थानीय लोगों सहित पर्यटकों की भारी सं या देखने को मिली। इस दौरान जाखू मंदिर व संकटमोचन मंदिर में सुदंर कांड पाठ, हनुमान चालिसा का पाठ किया गया। इस मौके पर कई गणमानय लोग उपस्थित रहे।
जाखू में  जय हनुमान ज्ञान गुन सागर…जय कपीस तिहूं लोक उजागर…. से भक्तों के जयकारों से हनुमान मंदिर गूंज उठा। सुबह 7 बजे विशेष आरती के बाद  हवन किया गया, साथ ही मंदिर के पुजारी ने हनुमान जी का हार श्रृगांर किया। इसके पश्चात मंदिर में डेढ क्विंटल का रोट हनुमान जी के लिए भोग लगाया गया। इसके साथ हलवे का प्रसाद व लड्डू का भोग भी लगाया गया, जिसे बाद में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।
सुंदर कांड पाठ का हुआ आयोजन
 इस अवसर पर मंदिर परिसर में धाॢमक संगीतमय वातावरण बनाने के लिए  भजन कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।  हनुमान जनोत्सव पर सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।
ऐसे बनता है रोट
जाखू में हनुमान जी को चढ़ाया जाने वाला रोट बहुत ही शुद्धता से बनाया जाता है। इसके लिए सबसे पहले आटे को गाय के दूध में गंूथा जाता है। इसके बाद इसकी पूरियों को गाय के घी में तला जाता है। तलने के बाद पूरियों का चूरा बनाकर इसमें मेवे मिलाए जाते हैं। इसके बाद गोल गोल लडडू बनाए जाते हैं। उसके बाद लड्डुओं को हनुमान को अर्पित किया जाता है और भक्तजन इसे बाद में प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं।

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