February 24, 2024

एमसी हाउस में प्रॉपर्टी टैक्स व पेयजल संकट पर हंगामा -भाजपा के साथ कांग्रेस पार्षदों ने भी महापौर को घेरा -शिमला में चार प्रतिशत संपत्ति कर बढ़ाने पर सहमति

शिमला नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में प्रॉपर्टी टैक्स और पेयजल संकट पर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा पार्षदों ने शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति चार दिनों से नहीं होने के चलते महापौर समेत शिमला जल प्रबंधन निगम को घेरा तो कांग्रेस के अपने ही कुछ पार्षदों ने प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ोतरी का विरोध किया। शनिवार को शिमला के बचत भवन में आयोजित हाउस में शहर के विकासात्मक कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में यह दूसरी मासिक बैठक थी। एमसी हाउस में शिमला शहर के विधायक हरीश जनारथा भी मौजूद रहे। बैठक में शहर के कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को लेकर चर्चा हुई। साथ ही नगर निगम शिमला की बैठक में 4 फ़ीसदी प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। बाद में इसे सहमति भी दी गई। प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने का भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने विरोध किया, वहीं सत्तापक्ष के पार्षदों ने तर्क दिया कि यह केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक किया जा रहा है। कांग्रेस पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने का विरोध किया। इसके अलावा नगर निगम शिमला में की मासिक बैठक में सफाई कर्मचारियों का मुद्दा एक बार फिर उछला। भारतीय जनता पार्टी की रुलदुभट्टा से पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि पिछली बैठक में विधायक ने सफाई कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से पता चला कि इस आरोप के बाद कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन अब हो गई इस बात से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

बन रही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की खामियों की रिपोर्ट
शिमला शहर के विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि राजधानी में स्मार्ट सिटी के तहत हो रहे प्रोजेक्ट्स में खामियों पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान स्मार्ट सिटी के नाम पर कई अनियमितताएं पाई गई थी। उन्होंने कहा कि नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में शहर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी शिमला शहर के विकास को आगे बढ़ाने के प्रतिबद्ध है. शिमला में जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसके लिए केंद्र को भी कई प्रस्ताव भेजे गए हैं। विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि शिमला में पानी बारिश के चलते पानी की समस्या भी बढ़ गई थी। बारिश की वजह से पानी में सिल्ट आया, जिसकी वजह से इसके चलते पानी की सप्लाई बाधित हुई। उन्होंने कहा कि वे शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के साथ बैठक करेंगे. प्रदेश सरकार आम जनता को रोजाना स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

आरए बढ़ाने को ग्रीन टैक्स पर भी हुआ मंथन
एमसी हाउस में ग्रीन टैक्स पर भी मंथन हुआ। हाल ही में कंगनाधार पार्षद रामरत्न वर्मा ने मेयर को ग्रीन टैक्स लगाने को लेकर प्रस्ताव सौंपा है। इसको लेकर मेयर सुरेंद्र चौहान ने भी मान्यता दे दी है। मेयर सुरेंद्र चौहान का कहना है कि इस हाउस में ग्रीन टैक्स को लेकर चर्चा की गई। यह प्रस्ताव नगर निगम के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। इससे जहां निगम की आय बढ़ेगी, वहीं शिमला के विकास में भी तेजी आएगी। बता दें कि पिछली नगर निगम ने भी ग्रीन टैक्स को लगाने के लिए कार्य किया था, लेकिन इससे लागू करने के लिए प्लान तैयार नहीं हुआ था। हालांकि अभी भी कोई प्लान तो इसको लेकर तैयार नहीं हुआ है, लेकिन इसको लेकर योजना बन गई है और नगर निगम ने भी इसको लेकर विचार-विमर्श करना शुरू कर दिया है। मेयर सुरेंद्र चौहान का कहना है कि ग्रीन टैक्स से शहर में जहां सभी गाडिय़ां रजिस्टर होंगी, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से भी यह कामगर सिद्ध होगा। इससे शरारती तत्त्व भी शहर में संभल कर रहेंगे।

ग्रीन टैक्स से होगा शहर में विकास
नगर निगम ग्रीन टैक्स को एकत्र कर शहर की सडक़ों और अन्य विकास कार्य में इस राशि को खर्च करेगा। वहीं, इससे टोल में कार्य करने वाले कर्मचारियों का वेतन भी निकाला जाएगा। इस टैक्स को एकत्र करने से निगम की आय में काफी बढ़ोतरी होने के आसार है।

हिमाचल नंबर वाली गाडिय़ों को नहीं देना होगा टैक्स
ग्रीन टैक्स सिर्फ हिमाचल से बाहर की गाडिय़ों पर भी लगाया जाएगा। शहर के लोगों या हिमाचल नंबर वाली गाड़ी को कोई ग्रीन टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि जो लोग शिमला में ही रह रहें हैं और उनके पास किसी अन्य राज्य का नंबर हैं, उन्हें भी यह टैक्स नहीं देना होगा। इसके लिए उन्हें स्थानीय पार्षद से एनओसी लेनी होगी, जिससे उनकी गाड़ियां नगर निगम में रजिस्टर हो जाएंगी और बाहरी राज्य के नंबर वाली गाडिय़ों को जो शिमला में ही रहते हैं, उन्हें एनओसी की कॉपी साथ रखनी होगी। वहीं, यही एनओसी वाहन मालिक या चालक को टोल पर दिखानी होगी। इसको दिखाने के बाद ही वह गाड़ी शहर में मान्य होगी। यदि यह कॉपी नहीं होगी तो उनसे ग्रीन टैक्स वसूला जाएगा।

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