February 28, 2024

दुर्गा अष्टमी पर मन्दिरो में उमड़ी भक्तों की भीड़ ,

शिमला।राजधानी के मन्दिरो में दुर्गा अष्टमी पर मंदिरों में सुबह से ही भक्त्तों का तांता लगा।रहा। लोग लम्बी।कतारों में लग कर मंदिर में पूजा अर्चना करते रहे। दुर्गा अष्टमी पर मंदिर में श्रद्धालुओ की लंबी भीड़ लगी रही। श्रदालुओ ने मन्दिरो में जाकर कन्या पूजन किया और उनका आशीर्वाद लिया। दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है
वहीं शहर के अन्य मंदिरों में कम संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए जा रहे हैं उपनगर संजौली में तिथि डींगू माता मंदिर मैं सुबह से ही भक्त पूजा अर्चना के लिए जाते रहे।
काली बाड़ी मंदिर के पुजारी चक्रवर्ती ने बताया कि नवरात्रों में दुर्गा अष्टमी का विशेष महत्व है इस दिन जहाँ कन्या पूजन कर हवन किया जाता है वही भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

उनका कहना था कि कोरोना काल मे जहाँ कर्फ्यू के कारण लोग घर मे ही कैद थे वही अब जब कोरोना कम हो गया और लोगो मे डर कम हो गया है तो लोग खुल कर घर से बाहर निकल रहे है और मन्दिरो में आ रहे है।।उनका कहना था कि

नवरात्रि की अष्टमी तिथि है। आज मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि महाष्टमी या दुर्गाष्टमी के दिन मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को कन्या पूजन भी किया जाता है। मान्यता है कि अष्टमी व नवमी तिथि में कन्या पूजन करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के नौ रूप आदिशक्ति के अंश और स्वरूप है। लेकिन भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में महागौरी विराजमान रहती हैं। दुर्गाष्टमी के दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी माना जाता है। कहते हैं कि महागौरी मनोकामनाएं पूरी करने के साथ अपने सभी भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी समस्याएं भी दूर करती हैं।
पुराणों के अनुसार, इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाशमान है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, शुंभ निशुंभ से पराजित होने के बाद देवताओं ने गंगा नदी के तट पर देवी महागौरी से ही अपनी सुरक्षा की प्रार्थना की थी। मां के इस रूप के पूजन से शारीरिक क्षमता का विकास होने के साथ मानसिक शांति भी बढ़ती है। माता के इस स्वरूप को अन्नपूर्णा, ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी भी कहा जाता है।

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