शिमला, कैंसर अस्पताल आई.जी.एम.सी में बनाए गुरू नानक का घर को एक साल पूरा हो गया है। इस उपलक्ष्य पर नोफल संस्था द्वारा शुक्रवार को कंस्टेंटर सेवा शुरू कि गई है। यदि किसी को कंस्टेंटर की जरूरत हो तो वह फ्री में ले जा सकते है। कोरोना महामारी के कारण पिछले साल इसकी काफी जरूरत लोगों को थी। इसी को देखते हुए संस्था ने इस साल ऑमिक्रान के बढते मामलों को देखते हुए पहले ही लोगों की सुविधा के लिए कंस्टेंटर सेवा शुरू की है। वहीं जरूरत मंद 15 परिवारों को कंबल व वस्त्र आदि दिए गए। संस्था द्वारा कैंसर अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों को लंगर दिया गया। इस अवसर पर नोफल संस्था के अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि गुरू नानक के घर को बनाके एक साल हो गया है। इस अवसर पर मरीजों व तीमारदारों को लंगर दिया गया। उन्होंने कहा कि गुरू नानक के घर में तीमारदारों व दूर दराज से मरीज के साथ आए लोगों को ठहरने के लिए बनाया गया है। इसके अलावा तीमारदारों को रात बिताने के लिए कंबल आदि भी दिए जाते है। उन्होंने कहा कि यह साल उतार व चढाव वाला रहा है। संस्था द्वारा कोरोना मरीजों के लिए 70 बिस्तर दान किए। वहीं 17 घोड़ो को अडाप्ट किया। उनके खाने पीने की पूरी व्यवस्था की। कोरोना मरीजों को डोर-टू-डोर खाना मुहैया करवाया। वहीं एक निशुल्क डेड बॉडी वैन आई.जी.एम.सी से चलाई। जो शिमला व आसपास के क्षेत्र में चलाई जा रही है। ठियोग की मझर पंचायत के एक व्यक्ति को घर का पूरा सामान दिया, क्योंकि आग लगने के कारण उसका सब कुछ जल चुका था। वहीं 11 सिलाई मशीने महिलाओं को दी। तीन सिलाई मशीने विधवाओं को दी। वहीं 14 महिलाओं को राशन दिया। कोरोना की वजह से कारोबार बंद हो गया था तथा 11 लडकियों की शादियां करवाई। जरूरत मंद को जूते कपडे दिए। वहीं गुरू नानक के घर में अब सुबह के समय नाशता भी दिया जाता है। इसके अलावा आवारा कुत्तों को अडपट किया।
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