October 18, 2026

छुआछूत से मुक्त होकर समरस समाज की ओर बढ़ रहा हिंदू समाज: संघ के 100 वर्ष और पंच परिवर्तन पर जोर

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शिमला हिंदू समाज में छुआछूत और जातिगत भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और पंच परिवर्तन के संकल्प के तहत सामाजिक बदलाव पर जोर दिया जा रहा है। वक्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज पुराने विचारों और परंपरागत सोच का विश्लेषण करे तथा समय के अनुरूप सकारात्मक बदलावों को अपनाए।
कार्यक्रम मे मुख्य वक्ता अवतार सिंह ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों और सामाजिक चर्चाओं में हिंदू समाज की कुरीतियों, छुआछूत और जाति-पाति का उल्लेख अक्सर प्रमुखता से किया जाता है। इससे कई बार यह धारणा बनती है कि सामाजिक बुराइयां केवल हिंदू समाज में ही मौजूद रही हैं, जबकि दुनिया के अन्य समाजों में भी विभिन्न प्रकार की कुरीतियां और भेदभाव देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक बुराइयों का विश्लेषण व्यापक दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, ताकि समाज में सुधार की प्रक्रिया को सही दिशा मिल सके।
छुआछूत समाप्त करना सबसे बड़ी चुनौती
वक्ता ने छुआछूत को हिंदू समाज के सामने प्रमुख सामाजिक चुनौती बताते हुए कहा कि इस कुरीति को पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है। उनके अनुसार, समाज तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है और उत्पीड़न तथा भेदभाव से मुक्ति की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक समरसता तभी मजबूत होगी, जब प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर मिले तथा जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न किया जाए।
उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए केवल चर्चा पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के बीच निरंतर संवाद और व्यवहार में परिवर्तन भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान पंच परिवर्तन के संकल्प के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है।
हर गांव में एक जलस्रोत, श्मशान और मंदिर की पहल
अवतार सिंह ने सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए हर गांव में एक जलस्रोत, एक श्मशान और एक मंदिर की अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य समाज के लोगों के बीच समानता, सहभागिता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। उनके मुताबिक, इस दिशा में काफी हद तक सफलता मिली है और समाज में समरसता का भाव बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
समरस समाज के निर्माण की उम्मीद
Unhone विश्वास जताया कि आने वाले समय में हिंदू समाज छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीति से पूरी तरह मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती आपसी सहयोग, समानता और भाईचारे में निहित है। सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर ही एक ऐसे समाज की स्थापना की जा सकती है, जहां सभी लोगों को सम्मान मिले और सामाजिक एकता मजबूत हो।
उन्होंने पुराने विचारों की समीक्षा करते हुए सकारात्मक बदलाव अपनाने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर बल दिया।
कमलानगर में गूंजा शस्त्र पूजन का जयघोष, संघ ने किया पथ संचालन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से रविवार को संजौली के कमलानगर में विजयदशमी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन किया और पथ संचालन के माध्यम से अनुशासन एवं संगठन की एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के अंतिम कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम संचालक मनोहर वर्मा ने बताया कि संघ की परंपरा के अनुसार हर वर्ष विजयदशमी से दो-तीन दिन पहले कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसी क्रम में इस बार भी विजयदशमी से पहले कार्यक्रम रखा गया। उन्होंने बताया कि संघ में विजयदशमी के दो दिन पहले या बाद में पथ संचालन करने की व्यवस्था रही है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अवतार सिंह ने कहा कि हिंदू समाज में कई सामाजिक कुरीतियां रही हैं, लेकिन समाज को इनसे ऊपर उठकर सामाजिक समरसता को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को पीछे छोड़कर समाज निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सामाजिक एकता और समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने निर्धारित मार्ग पर पथ संचालन किया। अनुशासित पंक्तियों में निकले स्वयंसेवकों ने संगठन की एकजुटता का संदेश दिया। शस्त्र पूजन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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