,एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने ऑल इंडिया फोरेंसिक साइंस एंट्रेंस टेस्ट (AIFSET) के सहयोग से फोरेंसिक साइंस इमर्सिव एक्सपीरियंस प्रोग्राम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को फोरेंसिक साइंस एवं आधुनिक अपराध जांच प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे अपने करियर से जुड़े निर्णय बेहतर तरीके से ले सकें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को फोरेंसिक जांच की वास्तविक प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। इसमें लाइव क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन सिमुलेशन, साक्ष्य संग्रहण, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, फोरेंसिक परीक्षण प्रक्रियाएं तथा प्रयोगशाला आधारित गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों ने साइबर फोरेंसिक, डिजिटल एविडेंस एनालिसिस, टॉक्सिकोलॉजी एवं आधुनिक जांच पद्धतियों से संबंधित विशेष अकादमिक सत्रों में भी भाग लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हिमाचल प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व अतिरिक्त निदेशक श्री महेश पठानिया ने कहा कि आधुनिक समय में निष्पक्ष एवं सटीक अपराध जांच के लिए फोरेंसिक साइंस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि डीएनए प्रोफाइलिंग, साइबर फोरेंसिक, फिंगरप्रिंट विश्लेषण एवं डिजिटल साक्ष्य जांच जैसी आधुनिक तकनीकों ने अपराध जांच प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय बनाया है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच पद्धतियों ने न्याय प्रणाली को मजबूत किया है तथा फोरेंसिक विशेषज्ञ कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, फोरेंसिक विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर पत्रकार परवीन मंगटा एवं दैनिक भास्कर से दीपिका भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर डॉ. रमेश चौहान, रजिस्ट्रार डॉ. आर. एल. शर्मा, डीन अकादमिक आनंद मोहन, डीन फैकल्टी अश्विनी शर्मा तथा एडिनबॉक्स के एवीपी विकास ढाका भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन व्यावहारिक प्रदर्शन, अकादमिक संवाद एवं फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में उभरती संभावनाओं पर चर्चा के साथ हुआ।
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में एआईएफएसईटी के सहयोग से फोरेंसिक साइंस इमर्सिव एक्सपीरियंस प्रोग्राम आयोजित

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