शिमला.शिमला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिमाचल प्रांत द्वारा प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इस अवसर पर हिमाचल प्रांत के संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा, विभाग संघचालक राजकुमार वर्मा और प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. बीर सिंह रांगड़ा ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बैठक समालखा (पानीपत) में आयोजित की गई। पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित कर शुभारंभ किया। सभा में सर्वप्रथम विगत वर्ष में देशभर के संघ कार्य एवं समाज सेवा में दिबंगत हुई महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा में हिमाचल प्रांत से 21 कार्यकर्ताओं सहित देशभर से कुल 1,438 कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रतिनिधि सभा में देशभर में संघ कार्य की स्थिति को लेकर चिंतन हुआ। पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं लगभग छह हजार की वृद्धि के साथ 88 हजार से अधिक हो गई हैं तथा स्थान भी बढ़कर 55 हज़ार से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। साप्ताहिक मिलन 32 हज़ार 606 जबकि मंडली की संख्या 13 हजार 211 हो गई है। प्रतिनिधि सभा में संघ शताब्दी वर्ष में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की भी विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। संघ शताब्दी वर्ष में देशभर में आयोजित कुल विजयादशमी उत्सव 62555 और उपस्थित स्वयंसेवक संख्या 32 लाख 45 हजार 141 रही। गृह सम्पर्क अभियान में 10 करोड़ 02 लाख 12 हजार 162 परिवारों में सम्पर्क किया गया, मंडल एवं बस्ती स्तर पर अभी तक संपन्न हुए हिन्दू सम्मेलनों की संख्या 37048 रहीं।
हिमाचल में वर्तमान में संगठनात्मक कुल 26 जिलों में 728 स्थानों पर 1045 शाखाएं, मिलन 283 एवं 141 संघ मंडली चल रहीं हैं। संघ शताब्दी वर्ष में आयोजित विजयादशमी उत्सव 204 कार्यक्रमों में 28916 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। गृह सम्पर्क अभियान 12 लाख 22 हजार 410 घरों में सम्पर्क एवं 4118 विशेष व्यक्ति सम्पर्क किया गया। कुल हिन्दू सम्मेलन कार्यक्रम 1089 संपन्न हुए।
संघ शताब्दी वर्ष में सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अथवा हिन्दुत्व केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए।
डॉ. वीर सिंह रांगड़ा जी ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु तेग बहादुर के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम की 150 वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी द्वारा वक्तव्य भी जारी किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संत शिरोमणि सहुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है। हमारी श्रेष्ठ संत परंपरा ईश्वर की भारत को एक विशिष्ट देन है। हमारे प्रदीर्घ इतिहास के प्रवाह में इस महान संत परंपरा ने जहां समाज में ईधर की उपासना और भक्ति भाव का जागरण किया, वहीं सामाजिक कुरीतियाँ और भेदभाव का उन्मूलन करते हुए समरस समाज के दृढीकरण के प्रयास किए। साथ ही उन्होंने विदेशी शासकों के अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष के लिए समाज को जागृत और सिद्ध भी किया है।

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