शिमला.हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया है। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा शिक्षकों की जायज मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो शिक्षक समुदाय अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होगा।
संघ के अनुसार विश्वविद्यालय के शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इनमें मुख्य रूप से पदोन्नति योजना के अंतर्गत वर्ष 2016 के वेतनमान का लंबित बकाया, 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान तथा शिक्षकों के लिए आवासीय परिसर में दो नए भवनों का निर्माण शामिल है। इन मांगों को लेकर शिक्षक लंबे समय से सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद कर रहे हैं, लेकिन अब तक इन मुद्दों पर संतोषजनक प्रगति नहीं हो पाई है।
संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद शिक्षकों से जुड़े वित्तीय और बुनियादी सुविधाओं के कई मुद्दे लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पदोन्नति योजना तथा वर्ष 2016 के वेतनमान का बकाया शिक्षकों का वैधानिक अधिकार है और इसका भुगतान लंबे समय से लंबित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे शिक्षकों में निराशा और असंतोष का माहौल बन रहा है।
संघ के महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते का भुगतान लंबित रहना शिक्षकों के लिए आर्थिक रूप से कठिन स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेते हुए शिक्षकों को उनका लंबित महंगाई भत्ता जारी करना चाहिए।
संघ के उपाध्यक्ष डॉ. योगराज ने शिक्षकों के लिए आवासीय सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में लंबे समय से नए आवासीय भवनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। वर्तमान में उपलब्ध आवासीय सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं और बड़ी संख्या में शिक्षक आवास की सुविधा से वंचित हैं। इसलिए शिक्षकों के लिए दो नए आवासीय भवनों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है, ताकि उन्हें बेहतर कार्य और जीवन परिस्थितियां मिल सकें।
संघ की सहसचिव डॉ. अंजलि ने कहा कि शिक्षक समुदाय केवल अपने अधिकारों की मांग कर रहा है और ये सभी मांगें पूरी तरह न्यायसंगत तथा वैधानिक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक हमेशा से प्रदेश में उच्च शिक्षा के विकास के लिए समर्पित रहे हैं और सरकार को भी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों को शीघ्र पूरा नहीं करती है तो शिक्षक कल्याण संघ प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा। संघ का कहना है कि उसका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं बल्कि संवाद और सकारात्मक पहल के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना है। हालांकि यदि शिक्षकों की मांगों की अनदेखी जारी रहती है तो शिक्षक समुदाय को अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करना पड़ेगा।
संघ ने प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि वे शिक्षकों की इन महत्वपूर्ण मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लें, ताकि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण और अधिक मजबूत हो सके।

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