शिमला. जिले के मशोबरा से सटे गांव चेवन में स्थानीय जल स्रोतों पर एक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त परिवार द्वारा अवैध कब्जे के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने उपमंडल दंडाधिकारी, पंचायत कोहलू-जुब्बड़ तथा वन विभाग मशोबरा को पूर्व में शिकायतें दी थीं, लेकिन कार्रवाई न होने का आरोप लगाया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक पहुंच के चलते संबंधित परिवार ने जलशक्ति विभाग की पानी आपूर्ति के नाम पर ग्रामीणों से पैसे मांगे। जब यह मामला जलशक्ति विभाग मशोबरा और कुसुम्पटी के अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, तो शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर विभागीय अधिकारियों ने आंख मूंद ली। आरोप है कि जलशक्ति विभाग की लोहे की पाइपों से छेड़छाड़ कर उक्त परिवार ने स्वयं के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली, जबकि अन्य ग्रामीणों को पानी से वंचित कर दिया गया।
स्थानीय ग्रामीण पूर्ण प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2024 से गांव की नियमित जल आपूर्ति बंद है, जिससे ग्रामीणों को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि संबंधित परिवार ने स्थानीय जल स्रोतों पर अवैध कब्जा कर लिया है और राजनीतिक संरक्षण तथा भ्रष्टाचार के कारण जलशक्ति विभाग ग्रामीणों को दी जाने वाली आपूर्ति बहाल नहीं कर रहा। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2024 से वे और अन्य ग्रामीण पानी के टैंकर मंगवाकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि वन क्षेत्र से जुड़े जल स्रोतों पर अवैध हस्तक्षेप किया गया है, जिसकी जानकारी वन विभाग को दी गई, लेकिन वहां से भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे पूरे क्षेत्र में जल संकट गहराता जा रहा है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मांग की है कि जलशक्ति विभाग मशोबरा और कुसुम्पटी के अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध कब्जों को हटाया जाए और गांव चेवन में नियमित जल आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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