शिमला.प्रदेश पेंशनर्स सयुंक्त सघर्ष समिति ने सरकार के फैसलों को लेकर विरोध जताया है। समिति का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन एवं सदस्यों की पेंशन में अभूतपूर्व वृद्धि किए जाने संबंधी अधिसूचना जारी करने पर, राजस्व विभाग में सेवानिवृत पटवारियों, कानूनगो, नाइब तैसीलदार और तहसीलदारों को पुनः विभाग में नियुक्त करने के फैसले का और मंत्रियों को तीन नई महंगी गाड़ियां खरीदने के फैसले का सुरेश ठाकुर, चेयरमैन, इन्दर पॉल शर्मा महासचिव,भूप राम वर्मा अतिरिक्त महासचिव, सैन राम नेगी, मीडिया प्रभारी ने हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने कड़े शब्दों में सरकार की निंदा की है।
सरकार द्वारा आयोग के चेयरमैन एवं सदस्यों की मासिक पेंशन को क्रमश आठ हजार व 7,500 से बढ़ाकर 48 हजार और व 45 हजार करना और मूल पेंशन में 6% वार्षिक वृद्धि का निर्णय लिया गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर प्रदेश के लाखों पेंशनरों की वैधानिक वित्तीय देनदारियों के भुगतान से बच रही है, वहीं दूसरी ओर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। प्रदेश में तथाकथित वित्तीय ‘डिज़ास्टर/लॉकडाउन’ की स्थिति के बावजूद ऐसे निर्णय लेना आमजन और जरूरतमंद पेंशनरों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
सरकार जनता के साथ कर रही मजाक
सुरेश ठाकुर ने कहा कि इससे पूर्व भी सरकार ने विभिन्न विभागों, निगमों और बोर्डों में बड़ी संख्या में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन एवं सदस्यों की नियुक्तियां कर, उनमें से अनेक को कैबिनेट रैंक प्रदान कर, प्रदेश के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ डाला है। इसके अतिरिक्त माननीय विधायकों, मंत्रियों, अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं मुख्यमंत्री के वेतन-भत्तों में लगभग 40% मासिक वृद्धि की अधिसूचना भी जारी की गई है, जो प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर और अधिक दबाव डालेगी। सरकार ने सलाहकारों और मुख्य सलाहकारों की नियुक्तियां कर भी अपनी मित्र-मंडली को लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए चेतावनी दी कि सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ डालकर चहेतों को खुश करने की नीति तुरंत बंद की जाए और पेंशनरों व कर्मचारियों की करोड़ों रुपये की लंबित देनदारियों के भुगतान हेतु तत्काल अधिसूचनाएं जारी की जाएं।
पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की ये मुख्य मांगें
– 1. 01-1-2016 से 31.01.2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, कम्यूटेशन एवं संशोधित पेंशन की अदायगी।
– 13% महंगाई भत्ता तथा 46 माह के महंगाई भत्ते के एरियर का भुगतान।
– हिमाचल पथ परिवहन निगम के पेंशनरों को दिसंबर माह की पेंशन का तत्काल भुगतान एवं पेंशन का स्थायी समाधान।
-शहरी निकायों के पेंशनरों को 01.01.2006 के स्थान पर 01-01-2016 वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर पेंशन।
– कारपोरेट सेक्टर एवं फॉरेस्ट कॉरपोरेशन कर्मचारियों को 1999 की अधिसूचना के अनुसार 2004 से पेंशन तथा उक्त अधिसूचना का पुनः क्रियान्वयन।
-बिजली बोर्ड कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ एवं पेंशन बकाया का भुगतान।
– चिकित्सा बिलों के भुगतान हेतु तत्काल ₹15 करोड़ की राशि जारी करना।
– पुलिस पेंशनरों के बच्चों हेतु पुलिस विभाग में नौकरी का कोटा तथा पूर्व सैनिकों की भांति कैंटीन सुविधा।
– हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को प्रिंटिंग आदि मदों के 70 करोड़ का भुगतान।
– हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पेंशनरों को प्रत्येक माह की पहली तारीख को पेंशन का भुगतान हाे।
More Stories
कमलपुर प्रेहती में पेयजल संकट: एक महीने से नहीं आ रहा पानी
सीएम सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग,RDG बंद होने के बावजूद भी OPS नहीं होगी बंद, भर्तियों भी रहेगी जारी,1066 पदों को भरने की कैबिनेट ने दी मंजूरी।
रामपुर/रोहड़ू में अलग-अलग स्थानों पर आगजनी कोई जानी नुकसान नहीं